कितनी दूर निकल आए हैं

छोड़कर अपना सब कुछ पीछे
कितनी दूर निकल आए हैं

सपने थे कितने जीवन को लेके
उनको गिरवी रख आए हैं

गुज़रे कल के ख़यालों में
तन्हा चल कर आए हैं

राहों और सफ़र की यादें
दिल में भर कर लाए हैं

कंधों पर कुछ बोझ पुराने
ख़ुद ही ढोकर लाए हैं

पूछे मन हर मोड़ पे ख़ुद से
क्या राह सही चल पाए हैं

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