Ek aur..

रस्ते ही रस्ते हैं यहाँ, कोई मन्ज़िल है कहाँ

भागते रहोगे जब तलक़, तुम रहोगे तन्हा

वो जो मन्ज़िल सी है वहाँ देखो पहुँच कर

एक और मन्ज़िल का रस्ता फिर मिलेगा वहाँ

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मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...