रस्ते ही रस्ते हैं यहाँ, कोई मन्ज़िल है कहाँ
भागते रहोगे जब तलक़, तुम रहोगे तन्हा
वो जो मन्ज़िल सी है वहाँ देखो पहुँच कर
एक और मन्ज़िल का रस्ता फिर मिलेगा वहाँ
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हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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