मैं बहता रहा, मुझे ठहरना न आया

मैं बहता रहा, मुझे ठहरना न आया

हर किनारे ने मुझे बस आज़माया


देकर बाँहों का सहारा तुमने मुझे थामा था

गहराई को अपनी तब मैंने पहचाना था

बहने वाले को कब मगर रुकना आया

मैं बहता रहा, मुझे ठहरना न आया


न साहिल की चाह रही और न चाहूँ समंदर

तेरी यादों के संग बहूँगा मैं उम्र भर

हर बीता कल मुझसे जुदा होता आया

मैं बहता रहा, मुझे ठहरना न आया

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