चला हूं जब तक बतलाये पथ पर
सबने हृदय से स्वीकार किया
चयन किया स्वयम् पथ का जो मैंने
मुझे उसी जग ने दुत्कार दिया !
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हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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