Aise Hi...

कभी सुख की गंगा में मैं तैरता रहा

तो कभी दुख की यमुना में डूबता पाया

जीवन रूपी संगम पे बैठा मुसाफ़िर

सरस्वती आनंद की पर ढूँढ न पाया

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हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...