Ek aur..

रस्ते ही रस्ते हैं यहाँ, कोई मन्ज़िल है कहाँ

भागते रहोगे जब तलक़, तुम रहोगे तन्हा

वो जो मन्ज़िल सी है वहाँ देखो पहुँच कर

एक और मन्ज़िल का रस्ता फिर मिलेगा वहाँ

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Aur bhi ...

चला हूं जब तक बतलाये पथ पर

सबने हृदय से स्वीकार किया

चयन किया स्वयम् पथ का जो मैंने

मुझे उसी जग ने दुत्कार दिया !

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Aise Hi...

कभी सुख की गंगा में मैं तैरता रहा

तो कभी दुख की यमुना में डूबता पाया

जीवन रूपी संगम पे बैठा मुसाफ़िर

सरस्वती आनंद की पर ढूँढ न पाया

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मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...