बादल की कोई चादर नहीं
उसमें एक भरा पूरा
चाँद चमक रहा है
नीचे एक झील है
बिल्कुल शांत
उसमे कोई तरंग नहीं
एक आइने की तरह ही उसमें
पूरा चाँद चमक रहा है
हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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