ख़ुद को बना हमसफ़र

ख़ुद से भाग कर कहाँ जाएगा मुसाफ़िर
तन्हाईयों में तू वापस आएगा मुसाफ़िर

यहाँ जो चैन है, सुकुनो-क़रार है
भटकेगा कहाँ ऐ बेक़रार मुसाफ़िर 

थक-हार कर सफ़र में बैठेगा जब कभी
ये डगर तुमको याद आएँगे मुसाफ़िर

काफ़िले निकल जाएँगे साथ तेरा छोड़कर
बस एक यही रिश्ता रह जाएगा मुसाफ़िर

गरम रेत पर कब तक चल पाएगा अकेला
ख़ुद को बना ले अपना हमसफ़र मुसाफ़िर 

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