स्लोप पर हूँ

मैं कहाँ हूँ !
किस राह से
किधर जा रहा हूँ !

कोई खींचता है मुझे
तो कोई फेंकता है
तो कोई धकेलता है

एक स्लोप पर हूँ
जाने मैं कब से
ख़ुद से तो अब
रुक पाना मुमकिन नहीं 

No comments:

मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...