हमारे जीवन के पन्ने पर
तुम उभरे थे
एक चंद्र-बिंदु की तरह
और धीरे-धीरे फैलकर
पूरी वर्णमाला हो गए
और हमारे जीवन की पुस्तक
मोटी होती जा रही है
समय-समय पर इसमें
नए अध्याय जो
तुम जोड़ दिया करते हो !

No comments:

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...