बकौल गालिब .....
"कहते हैं अगले ज़माने में कोई मीर भी था"
और ज़ौक फरमाते हैं .....
"न हुआ पर न हुआ मीर का अंदाज़ नसीब"
उसी मीर के बारे में एक video हाथ लगी है .... share कर रहा हूँ ......
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हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है
हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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सारी दुविधा, द्वंद्व, विषाद, संशय और प्रश्न अर्जुन के मन में है। दुर्योधन के मन में कोई दुविधा नहीं, कोई संशय नहीं। कृष्ण को भी कोई दुविधा न...
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साधो सहज समाधि भली साधो सहज समाधि भली जंतर-मंतर तू तो करदा मस्जद-मंदर तू तो फिरदा हलचल इतनी फिर क्यों अंदर चल दे अब तू होश गली साधो सह...
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प्रेम गली अति साँकरी, जा में दुई ना समाय जब "मैं" था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाय कबीर को समझा नहीं जा सकता है, हाँ कबीर हुआ ज...
2 comments:
दिलचस्प !!!!
rochak post ...........shukriya
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