वाह रे मीर, खुदा-ऐ-सुखन ....

बकौल गालिब .....
"कहते हैं अगले ज़माने में कोई मीर भी था"

और ज़ौक फरमाते हैं .....
"न हुआ पर न हुआ मीर का अंदाज़ नसीब"

उसी मीर के बारे में एक video हाथ लगी है .... share कर रहा हूँ ......

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मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...