बूँदें मोहब्बत की ...

चलो आँधी ढूँढ कर लायें
वो आँधी जो बारिश लाएगी
बड़े-बड़े बादल के काले टुकड़े
मुसलाधार बरसाएंगे मोहब्बत की बूँदें

सुना है दूर उस पहाड़ी के पीछे है वो जगह
पर इतना आसान नहीं है वहां तक पहुंचना
इस बार सबको मिलकर बड़ी कोशिश करनी होगी
चाहते गर मोहब्बत का नाम-ओ-निशाँ बचाकर रखना

1 comment:

Meenu Khare said...

बहुत सुंदर .

मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...