वो जो कभी मेरे दिल में रहते थे
संग-संग मेरी राहों में चलते थे
जो थे रौशनी का सुराग, मुसाफिर का हौसला
उन इरादों का सुना मैंने क़त्ल हो गया
हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
1 comment:
बढ़िया!
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