वो जो कभी मेरे दिल में रहते थे

संग-संग मेरी राहों में चलते थे

जो थे रौशनी का सुराग, मुसाफिर का हौसला

उन इरादों का सुना मैंने क़त्ल हो गया

मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...