भू की प्यास बुझाने वाला बादल बन तू
नदिया, दरिया, दरख़्त, पहाड़ सा कोई
हँस कर सब लुटाने वाला पागल बन तू
हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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