मौला मेरी अरज़ सुनो

एक नियाज़ी की गुहार पर
मौला अब न इंकार कर
मत फेर नज़रें इधर से
कब से खड़ा तेरे द्वार पर

छोटी सी एक फ़रियाद है
दुखियारे मन की आस है
एक तेरा दामन मेहफ़ूज़
बस तेरा ही विश्वास है

बन्दे को अब ना निराश कर
जी रहा हूँ तेरी आस पर
तेरा ही नाम बसा है मौला
मेरी एक-एक साँस पर                            

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