कहानी बनती है तब जब कोई दीवाना होता है
दुश्मन जिसका तख़्तो-ताज़ो-ज़माना होता है

No comments:

मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...