मैं जानता हूँ
तुमने ऊँचाइयाँ
हासिल कर ली हैं
ऐवरेस्ट हो गए हो
ख़ुश्क और ठन्डे

कभी-कभी तो
उतरो अपने आसमान से
आओ तो जरा  मैदानों में
पिघल जाओ और बहने लगो
फिर ज़िन्दगी की धार बनकर 

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मूरख तू जिएगा कब !

नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...