आंखों का समंदर सूख चला
दिल भी अब परेशान नहीं
जिंदगी तू मुझसे नाराज़ सही
मैं तुमसे हैरान नहीं
जीने की अब पड़ गई आदत
ग़म से अपनी यारी है
दर्द का होता एहसास नही
जाने क्या बीमारी है!
हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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