आंखों का समंदर सूख चला
दिल भी अब परेशान नहीं
जिंदगी तू मुझसे नाराज़ सही
मैं तुमसे हैरान नहीं
जीने की अब पड़ गई आदत
ग़म से अपनी यारी है
दर्द का होता एहसास नही
जाने क्या बीमारी है!
नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...
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