इस ब्लॉग के बारे में ....
कुछ शुरू करने से पहले थोड़ा tone set कर ली जाए। हिन्दी के कुछ blogs पढ़कर दिल में एक ख्याल आया है कि क्यों न मैं भी फिर से कुछ लिखूं और इस बार हिन्दी में। Blogging की ये कोई कोशिश मेरी पहली नही है, फर्क इतना है कि हिन्दी में नही लिखा। विषय कोई ख़ास नही है अभी फिलहाल दिमाग में। जब जो दिल में आएगा लिखेंगे - कैफियत, तबियत और फुर्सत के हिसाब से। हिन्दी और उर्दू पोएट्री एक अहम् हिस्सा होंगीं इस space का। कुछ मशहूर कवियों और शायरों और उनकी कविताओं और ग़ज़लों का बराबर ज़िक्र होता रहेगा और बीच-बीच में अपनी भी बातें होंगी। इसके अलावा थोडी बहुत philosophy और कुछ रोज़मर्रा की बातें भीं.
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हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है
हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...
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सारी दुविधा, द्वंद्व, विषाद, संशय और प्रश्न अर्जुन के मन में है। दुर्योधन के मन में कोई दुविधा नहीं, कोई संशय नहीं। कृष्ण को भी कोई दुविधा न...
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साधो सहज समाधि भली साधो सहज समाधि भली जंतर-मंतर तू तो करदा मस्जद-मंदर तू तो फिरदा हलचल इतनी फिर क्यों अंदर चल दे अब तू होश गली साधो सह...
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प्रेम गली अति साँकरी, जा में दुई ना समाय जब "मैं" था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाय कबीर को समझा नहीं जा सकता है, हाँ कबीर हुआ ज...
1 comment:
स्वागत है आपका।
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