पतंजलि का "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः", और  जावेद अख़्तर का "मन से रावण जो निकाले, राम उसके मन में हैं", अर्थ में दोनों मुझे एक ही लगते हैं। 

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...