अब नहीं होता

डर कर जीवन अब और नहीं होता
बुलशिट सहन अब और नहीं होता
सपने हैं कई बंद इक बक्से में
ये बोझ वहन अब और नहीं होता

ये कहें ऐसा कर लो अच्छा होगा
वो कहें वैसा कर लो अच्छा होगा
मन चाहता है कुछ और ही करना
पूछ कर चयन अब और नहीं होता

गुस्सा छुपा के है रखना सीखा
सब को बस खुश रखना सीखा
पर जो अंदर है अब वही हो बाहर
झूठ प्रदर्शन अब और नहीं होता

जीकर इतना तो हमने जाना
पाना-खोना बस अफसाना
मिल जाए तो अच्छा, पाने को पर
चंचल मन अब और नहीं होता 

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