हृदय का रुदन ही तो
कवि का गान बन जाता है
दर्द हद से गुज़र कर ही
गीत महान बन जाता है

जीवन भी कैसे रंग बदलता
कभी आँसू तो कभी
मुस्कान बन जाता है
तब  सार्थक है कवि का जीना
दर्द जीवन का जब
कविता का प्राण बन जाता है


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