वर्तमान की ज़मीन के ऊपर
यादों और ख़यालों का
बहुत बड़ा स्पेस है
और मन एस्ट्रोनॉट है
बिना स्पेस शिप और
बिन स्पेस शूट के उड़ जाता है
जब-तब उस स्पेस में
एस्केप वेलोसिटी से
बताओ  भला अब वो ज़मीन
पर वापस कैसे आएगा
उसी स्पेस के
सबसे चमकीले तारे हो तुम
मेरा मन भी चाँद की तरह
चमकता है तुम्हारी रौशनी से 

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