इस इमपरमानेन्ट ज़िन्दगी में अगर कोई परमानेंट चीज है तो वो दर्द है। दर्द को डील करना एक हुनर है, एक आर्ट है। कोई इसकी गहराई में डूब जाता है तो कोई इसकी कीचड़ से सतरंगी फूल खिलाता है और कोई दर्द की नाव पे सवार होकर आनंद के अनंत महासागर तक पहुँच जाता है। इसमें कोई डूब कर शराबी हो जाता है तो कोई इसे पीकर शायर और कोई इससे उबर कर संत।
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मूरख तू जिएगा कब !
नींद से अब जाग तू कर्म से मत भाग तू मन में अब ठान तू चुनेगा उत्थान तू जीवन तो बहता जाए कौन इसे बाँध पाए जी ले यहाँ इसी पल तू कहाँ ये वा...
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सारी दुविधा, द्वंद्व, विषाद, संशय और प्रश्न अर्जुन के मन में है। दुर्योधन के मन में कोई दुविधा नहीं, कोई संशय नहीं। कृष्ण को भी कोई दुविधा न...
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साधो सहज समाधि भली साधो सहज समाधि भली जंतर-मंतर तू तो करदा मस्जद-मंदर तू तो फिरदा हलचल इतनी फिर क्यों अंदर चल दे अब तू होश गली साधो सह...
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प्रेम गली अति साँकरी, जा में दुई ना समाय जब "मैं" था तब हरि नहीं, अब हरि है मैं नाय कबीर को समझा नहीं जा सकता है, हाँ कबीर हुआ ज...