बेचैन अकेली रात
हमसफ़र चाँद के
इंतज़ार में
तड़प रही थी

सुबह होने वाली थी 
और उसे डर था
आसमां के पार्क में
शिव-सैनिक जैसा
आएगा सूरज
और उन दोनों को
फिर से
जुदा कर देगा 

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है

हमसे छूट गया जो उस डगर की याद आती है पूरा हो न सका जो उस सफ़र की याद आती है दिन ढलते ही दिल में जब मायूसी छा जाती है भूली हुई हर तस्वीर खुद-...